क्या बात है भाई तू मार्केट में कैसे इन्वेस्ट करता है य ये बाबा आदम की तरह
इन्वेस्ट करता है बाबा
[हंसी]
आदम ये बाबा आदम के जमाने का तरीका हटा अकल लगा मेरे एसेट केम स्टॉक पे आ जो
लेटेस्ट टेक के साथ इन्वेस्टिंग को फास्ट स्टेबल और आसान बनाता है अकल लगाओ एंड स्टॉक पे आओ इन्वेस्टमेंट्स एंड
सिक्योरिटीज मार्केट्स आर सब्जेक्ट टू मार्केट रिस्क रीड ऑल द रिलेटेड डॉक्युमेंट्स केयरफुली बिफोर इन्वेस्टिंग अनिल अंबानी की सारी कंपनियों
पे कुल मिला के 172000 करोड़ का कर्ज था इन्होंने सिर्फ
इंडियन बैंकों से नहीं बल्कि चाइनीज बैंकों से भी कर्ज लिया था अनिल को अब लगने लगा कि उनके सारे बिजनेस फेलियर के
पीछे मुकेश अंबानी का ही हाथ है अनिल को जेल जाने से बचाने के लिए उनकी मां मुकेश
से मदद मा मांगती हैं यह अंबानी के लिए एक बहुत बड़ा झटका था लेकिन इकलौता नहीं था
क्या यहां कोई अनिल अंबानी की जान लेने की कोशिश कर रहा था नमस्कार दोस्तों साल 2008 में अनिल
अंबानी दुनिया के छठे सबसे अमीर आदमी थे इनकी वेल्थ 42 बिलियन डॉलर्स थी अपने भाई
मुकेश अंबानी से भी ज्यादा लेकिन 16 साल फास्ट फॉरवर्ड करो आज 2024 में अनिल
अंबानी कहीं भी स्टैंड नहीं करते कर्जदार इनके पीछे पड़े हैं कई सारे कोर्ट केसेस इन पर चल रहे हैं और सेवी ने इनको अब
इंडियन मार्केट से बैन कर दिया है 5 सालों के लिए आखिर यह कैसे हुआ इस डाउनफॉल की
कहानी के पीछे छिपी है दो भाइयों की ऐसी लड़ाई जिसके बारे में ज्यादा लोग जानते नहीं है एक ऐसी लड़ाई जिसका असर पूरे देश
के पॉलिटिकल और फाइनेंशियल सिस्टम पर देखने को मिला है और एक ऐसी लड़ाई जिसमें अलग-अलग पार्टीज के पॉलिटिशियन भी बीच में
इवॉल्व हुए हैं आइए आज के वीडियो में जानते हैं दोस्तों पूरी कहानी मुकेश और अनिल अंबानी की
वीडियो शुरू करने से पहले कहना चाहूंगा दोस्तों कि जो भी चीज मैं आपको इस वीडियो में बताने जा रहा हूं हो सकता है वह आपको
सुनने में बहुत शॉकिंग लगे लेकिन एक भी चीज मेरी खुद से बनाई हुई नहीं है मेरी अपनी राय नहीं है एक-एक लाइन एक-एक क्लेम
का सोर्स किसी ना किसी पुराने न्यूज़ आर्टिकल से है या किताब से है आप इन सोर्सेस को रेफर करना चाहे तो यह
डिस्क्रिप्शन में आपको मिल जाएंगे वीडियो इस कहानी की शुरुआत होती है दोस्तों इन दोनों भाइयों के पिता से धीरू भाई अंबानी
एक वक्त पर धीरू भाई अंबानी एक गैस स्टेशन के अटेंडेंट होते थे लेकिन 1980 तक आते-आते ये इंडिया के सबसे बड़े बिजनेसमैन
में से एक बन गए थे फरवरी 1986 की बात है कि इन्हें एक स्ट्रोक हो गया और इसकी वजह
से इनका राइट हैंड पैरालाइज हो गया इसके बाद ही था कि इन्होंने अपने बेटों मुकेश और अनिल को बिजनेस सौंपना शुरू किया मुकेश
अंबानी थोड़े इंट्रोवर्ट टाइप के थे तो वो ऑपरेशन संभालते थे उनका काम था टाइम और बजट में मेगा प्रोजेक्ट्स को सेटअप करना
वहीं दूसरी तरफ अनिल अंबानी थोड़े एक्सट्रोवर्ट थे इसलिए
पब्लिक रिलेशंस कॉरपोरेट अफेयर्स सरकार के साथ लॉबिंग और मार्केटिंग संभालना उनका काम था साल 1991 में धीरू भाई ने मुकेश
अंबानी को
reliancejewels.in आप शायद सोचोगे कि आखिर क्या कारण था कि धीरू भाई मुकेश को ही प्रेफर करते थे अनिल को नहीं इसके पीछे कई
कारण थे इनमें से एक पारिवारिक भी था अनिल अंबानी का टीना मुनीम से शादी करने का
डिसीजन टीना मुनीम बॉलीवुड की एक ग्लैमरस सेलिब्रिटी थी अपने समय की ये पहले मिस इंडिया बनी थी और इनकी पहली फिल्म देश
परदेश बड़ी हिट हुई थी इन्हें साल 1980 में मॉडर्न इंडियन वुमेन की तरह देखा जाता था इनके कपड़े उस वक्त के हिसाब से
रिवीलिंग माने जाते थे और ये फेमस एक्टर राजेश खन्ना के साथ लिविन में भी र कहती थी अनिल अंबानी की इनसे मुलाकात हुई थी एक
पार्टी में दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे और फैसला किया अनिल ने कि वह शादी करना चाहते हैं लेकिन एक प्रॉब्लम थी एक
सोशल हर्डल था बात यह थी कि अंबानी फैमिली एक कंजरवेटिव गुजराती फैमिली थी और किसी भी हालत में उ टीना को अपनी बहू के रूप
में स्वीकार करने को तैयार नहीं थे धीरू भाई अंबानी ने इस शादी का बहुत विरोध किया इनफैक्ट इसे तुड़वाने की पूरी कोशिश करी
गैस वर्स क्रोनी कैपिटल ज्म एंड द अंबानी इस किताब के पेज नंबर 41 पर देखिए क्या लिखा है धीरू भाई अंबानी ने सरकार के के
भीतर अपने क्लाउट का इस्तेमाल किया और टीना पर ईडी की रेड पड़वा दी कैवन मैगजीन
में 2015 में लिखा गया ये आर्टिकल इस चीज को कंफर्म करता है कि टीना पर रेड पड़ी थी ईडी की लेकिन अपने फादर के ऑब्जेक्शंस के
बावजूद अनिल ने कहा कि वो टीना से ही शादी करेंगे अनिल को यह भी पता चला कि ईडी की टीम ने टीना के साथ मिसबिहेव किया था इसी
के बाद ही अनिल ने धीरू भाई को धमकी दी कि अगर वो टीना को अपनी बहू के रूप में स्वीकार नहीं करेंगे तो वो फैमिली छोड़
देंगे पूरा फिल्मी ड्रामा चल रहा था यहां पर इसके बाद फैमिली और फ्रेंड्स ने इंटरव्यू किया और धीरू भाई को शादी कराने
के लिए राजी किया फरवरी 1991 में इनकी शादी होती है और टीना मुनीम बन जाती हैं
टीना अंबानी दूसरी तरफ मुकेश की कहानी बिल्कुल उल्टी थी मुकेश ने उस लड़की से शादी करी जो उनकी मां को पसंद थी उनकी मां
कोकिला बहन ने एक भरत नाट्यम डांस रिसाइट में नीता दलाल को देखा और कुछ इस तरीके से
शादी होती है मुकेश और नीता की नीता दलाल नीता अंबानी बन जाती हैं और अब फैमिली में
इन्हें असली बहू माना जाने लगता है जबकि टीना को एक आउटसाइडर की तर देखा जाता है
धीरू भाई और कोकिला बहन फैमिली के इंपॉर्टेंट डिसीजंस के लिए नीता पर डिपेंडेंट होते हैं और दूसरी तरफ टीना को
कोई भी बड़ा रोल नहीं मिलता ऊपर से साल 1994 में एक बड़ी इंटरेस्टिंग चीज होती है
संदीप टंडन जो एक आईआरएस ऑफिसर थे जिन्होंने टीना के घर पर ईडी की रेड मारी थी वो
21 सेंचुरी में लेकर जा सकते हैं इसके संकेत मिलने शुरू हुए जब reliance1 सेक्टर में अपनी एंट्री की
reliance1 अनिल को यह भी लगता था कि जो कंपनी में उनका रोल है पॉलिटिशियन ब्यूरोक्रेट्स और मीडिया को मैनेज करना
उसको अप्रिशिएट नहीं किया जा रहा था अनिल अंबानी मैनेजर्स को भी सेट करते थे लेकिन वो
नाराज थे कि उनसे ज्यादा इंपॉर्टेंस मुकेश अंबानी अपने लॉयलिस्ट को दे रहे थे धीरू
भाई अंबानी के जिंदा रहते हुए भी साल 1999 तक दोनों भाइयों के बीच ये बड़ी दरार आ
चुकी थी
मेगा मर्जर अनाउंस किया इसमें इन्होंने
reliance1 धीरू भाई अंबानी का देहांत होता है इसके बाद मुकेश अंबानी के पास
भाइयों के बीच में टेंशंस और बढ़ने लगती हैं अनिल अंबानी को लगता है कि मुकेश आरआईएल का इस्तेमाल कर रहे हैं अपने
टेलीकॉम वेंचर को फाइनेंस करने के लिए और उससे खुद को और अपने दोस्तों को पर्सनल फायदा पहुंचाने के लिए इसके अलावा नीता
अंबानी का रोल भी
दी इसके साथ-साथ एक और प्रस्ताव पास हुआ कि वाइस चेयरमैन को चेयरमैन के अंडर काम करना होगा अनिल को इससे समझ आने लगा कि
मुकेश अब उनको पूरी तरीके से साइडलाइन करना चाह रहे हैं धीरू भाई के देहांत के बाद अनिल चाहते थे कि उनकी मां कोकिला बैन
सि यादव और अमर सिंह के साथ नजदीकियां मुकेश इससे काफी अनकंफर्ट बल थे धीरू भाई
अंबानी भी नेताओं के साथ नजदीकियां रखते थे जैसे कि इंदिरा गांधी के साथ लेकिन वह सभी नेताओं के साथ बनाकर चलते थे किसी एक
पॉलिटिशियन को ज्यादा फेवर नहीं करते थे लेकिन अली अंबानी समाजवादी पार्टी से ज्यादा ही नजदीक आ रहे थे जून 2004 में
उत्तर प्रदेश से एक इंडिपेंडेंट कैंडिडेट के रूप में राज्यसभा के लिए नॉमिनेशन फाइल किया जाता है एनएल अंबानी के द्वारा और
अमर सिंह और मुलायम सिंह यादव की मदद से वो जीत भी जाते हैं इसका कारण था कि कांग्रेस की सरकार उस वक्त सेंटर में
नई-नई चुनकर आई थी और समाजवादी पार्टी उस वक्त कांग्रेस की मेन राइवल्स में से एक
थी आज की तरह नहीं आज दोनों ही एक दूसरे की अलाइज हैं लेकिन उस वक्त काफी अपोजिशन में रहती थी ये दोनों पार्टीज एक दूसरे के
मुकेश अंबानी को लगा कि ये रिलायंस के बिजनेस इंटरेस्ट के लिए अच्छा नहीं है कि एक अपोजिशन पार्टी के साथ अनिल अंबानी
इतने नजदीक हो रहे हैं तो यह कांग्रेस पार्टी को पसंद नहीं आएगा इसके अलावा जब अनिल अंबानी ने राज्यसभा के लिए अपना
फॉर्म भरा था तो उनको अपनी और अपनी पत्नी की वेल्थ डिक्लेयर करनी पड़ी और मुकेश इस चीज से भी नाखुश थे कि अब पब्लिकली सबको
पता था इनके पास कितना पैसा है एक तीसरा कारण भी था यहां पर मुकेश अनिल के पावर जनरेशन प्रोजेक्ट से बड़े नाखुश थे अनिल
अंबानी ने उत्तर प्रदेश के दादरी में गैस बेस्ड इलेक्ट्रिसिटी पावर प्लांट शुरू करने की घोषणा करी थी इसके लिए उन्होंने
कहा था जो गैस आएगी वो कृष्ण गोदावरी बेसिन में जो गैस डिस्कवरीज हुई है वहां से आएगी मुकेश का ये मानना था कि अनिल ने
इस प्रोजेक्ट को
4 इस पॉइंट तक आते-आते दोनों भाइयों के बीच में जो रिश्ते थे वो ब्रेकिंग पॉइंट तक पहुंच चुके थे टाइम्स ऑफ इंडिया ने एक
फ्रंट पेज रिपोर्ट में कहा कि एक बड़े बिजनेस ग्रुप के दो भाइयों के बीच में दरार आ गई है उस वक्त ज्यादातर अखबारों
में हिम्मत होती थी डेरिंग खबरें छापने की आज की तरह नहीं जब सारे गोदी मीडिया बने बैठे हैं लेकिन इसके बाद 18 नवंबर 2004 को
दो मजेदार चीजें हुई इस दिन सीएनबीसी टीवी 18 के एक बिजनेस सेमिनार में मुकेश अंबानी
गए थे और वहां पर माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ स्टीव बोमर आए हुए थे स्टीव असल में मुकेश के दोस्त और क्लास मेट रहे थे ये दोनों
स्टैनफोर्ड बिजनेस स्कूल में साथ में पढ़ाई करते थे अब हुआ क्या कि इन्होंने अपनी स्पीच में एक ऐसी चीज कह दी जो बड़ी
ही शॉकिंग थी इन्होंने कहा कि स्टैनफोर्ड बिजनेस स्कूल के उनके बैच में सिर्फ दो लोग ही थे जिन्होंने पहले ही साल में
ड्रॉप आउट कर लिया था एक वो खुद थे और दूसरे मुकेश अंबानी थे इसे सुनकर ऑडियंस
शॉक्ड रह गई क्योंकि सालों तक दुनिया को यही लगता था कि मुकेश अंबानी ने स्टैनफोर्ड से अपनी एमबीए कंप्लीट करी है
से काफी अपसेट हुए और कुछ ही देर में वह वहां से चले गए लेकिन जाने से पहले उन्होंने एक और बम फोड़ दिया उन्होंने कहा
कि
लड़ाई धीरे-धीरे एक ओपन वॉर बन जाती है जो मीडिया में लड़ी जाती है इसमें अनिल अंबानी के पास अपर हैंड था मुकेश के खिलाफ
एक के बाद एक खबरें छपने लगती हैं मुकेश ने किन नेताओं के साथ सौदेबाजी करी है
reliance1 सात महीनों में मुकेश अंबानी की पब्लिक इमेज काफी खराब हो जाती है दिसंबर
2004 तक आते-आते हालात इस कदर बिगड़ गए थे कि देश के फाइनेंस मिनिस्टर पी चि दमर को
इंटरव्यू करना पड़ता है वह कहते हैं कि इन दोनों भाइयों की लड़ाई के बीच में देश का नुकसान हो रहा है यह लड़ाई करना बंद करो
सरकार की तरफ से प्रेशर आता है प्राइम मिनिस्टर मनमोहन सिंह की तरफ से प्रेशर आता है हालांकि पीएमओ ने इस चीज को बाद
में डिनायर इसके अलावा इनकी मां कोकिला बहन की तरफ से प्रेशर आता है और आईसीआईसीआई बैंक के चेयरमैन और इनके
फैमिली फ्रेंड केवी कमात भी आते हैं इंटरवेनर हैं और इन सबके प्रेशर में मुकेश अंबानी समझौते के लिए तैयार हो जाते हैं
जून 2000 पा में अपेरेंटली दोनों भाई अपना झगड़ा सुलझा लेते हैं और दोनों भाइयों के बीच में एक एग्रीमेंट साइन किया जाता है
इस एग्रीमेंट के तहत मुकेश को फ्लैगशिप कंपनीज जैसे आरआईएल और इंडियन पेट्रो केमिकल्स कॉरपोरेशन लिमिटेड मिलेगी इस
वाली कंपनी को 2002 में अटल बिहारी वाजपेई की सरकार ने
reliance1 साल के लिए एक नॉन कंपीट एग्रीमेंट भी साइन करते हैं कि अगर किसी भाई की एक कंपनी किसी सेक्टर में है तो
दूसरा भाई उसके कंपटीशन में अपनी कंपनी नहीं बनाएगा कम से कम 10 साल के लिए इस समझौते के तहत मोटे-मोटे तौर पर मुकेश
अंबानी को ri5 पर एसेट्स मिल जाते हैं और अनिल
अंबानी को 30 से 40 पर एसेट्स इसी के बाद 2007 तक आते-आते अनिल अंबानी की नेटवर्थ
तीन गुना बढ़ चुकी थी 45 बिलियन डॉलर्स और मुकेश अंबानी की नेटवर्थ थी 49 बिलियन डॉल
दोनों एक दूसरे के काफी बराबर की टक्कर में थे अब सब लोगों को लग रहा था कि दोनों भाइयों के बी झगड़ा परमानेंटली खत्म हो
चुका है लेकिन ऐसा था नहीं मुकेश अंबानी काफी नाराज थे कि
reliance1 में जब अनिल अंबानी
reliance1 दादरी वाला पावर प्रोजेक्ट जो इन्होंने अनाउंस किया था उसके लिए ही इन्होंने ये
ने 12000 करोड़ रपए खट्टे किए थे जिस दिन यह आईपीओ लच हुआ उस दिन यह इंडिया की सबसे बड़ी कंपनी थी डे वन ऑफ
reliance1 ही दिन में शेयर प्राइस ऑलमोस्ट 20 पर तक गिर गया अनिल ने कहा कि ये इसलिए हो रहा है क्योंकि मुकेश की कंपनीज ये कर
रही हैं अनिल ने सेबी को शिकायत करी कि शेयर अलॉट होने के 4 मिनट में ही मोरिशियस की सात कंपनीज ने शेयर बेचना शुरू कर दिया
था और ये कंपनीज मुकेश से जुड़ी हुई थी इन शेयर्स के बढ़ते ही अनिल अंबानी मुकेश अंबानी से अमीर हो जाते लेकिन दाम गिरने
की वजह से ऐसा हुआ नहीं ये अनिल अंबानी के लिए एक बहुत बड़ा झटका था लेकिन इकलौता नहीं था इसके बाद एक दूसरा झटका इन्हें
लगता है एमटीएन डील के वक्त इनकी रिलायंस कम्युनिकेशन की कंपनी साउथ अफ्रीकन टेलीकॉम कंपनी एमटीएन के साथ मर्ज होने का
प्रोसेस शुरू कर रही थी अगर यह डील हो जाती तो एक बार फिर से अनिल मुकेश अंबानी से ज्यादा अमीर हो जाते लेकिन मुकेश ने
इसका विरोध किया मुकेश अंबानी ने दोनों भाइयों के बीच हुए एग्रीमेंट को दिखाया और कहा कि देखो इसमें क्या लिखा है अगर दोनों
भाइयों में से कोई भी अपनी कंपनियों में स्टेक बेचेगा तो दूसरे भाई को राइट टू फर्स्ट रिफ्यूज देना होगा यानी कि अगर कोई
भी भाई अपनी कंपनी में शेयर बेच रहा है तो सबसे पहले वो शेयर दूसरे भाई को ऑफर करने होंगे और अगर वो नहीं खरीदता तभी यह शेयर
किसी और को ऑफर किए जा सकते हैं अनिल अंबानी ने इस एग्रीमेंट को बायपास कर ने की कोशिश करी यह सोचकर कि क्यों ना उस
साउथ अफ्रीकन एमटीएन कंपनी में मैं खुद ही डायरेक्टली शेयर खरीद लूं 51 पर शेयर इन्होंने खरीदने की कोशिश की लेकिन तब तक
यह जो एमटीएन कंपनी थी इसने इस लड़ाई को होते हुए देखा और सोचा कि इन दोनों भाइयों के झगड़े के बीच में यह ना फंस जाए इस डील
में तो पीछे हट गए डील से ये तो सीधी-सादी लड़ाइयां थी लेकिन इसके अलावा अनिल अंबानी ने कहा कि मुकेश उन्हें नुकसान पहुंचाने
के लिए पॉलिटिकल प्रेशर भी लगा रहे हैं अनिल की कंपनी ने दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट के प्राइवेटाइजेशन बिड में पार्ट
लिया था और वो हाईएस्ट बिडर थी लेकिन लेकिन आखिर में सरकार ने डिसाइड किया कि ये जो कंपनी बिड कर रही है उनका कॉन्फ्लेट
ऑफ इंटरेस्ट है और इसलिए ये कांट्रैक्ट सेकंड हाईएस्ट बिडर को दे दिया कहा जाता है कि इसके पीछे मुकेश अंबानी थे ऐसा ही
कुछ कोल बेस्ड मीथेन एक्सट्रैक्ट करने के कांट्रैक्ट्स के साथ हुआ और अनिल को अब लगने लगा कि उनके सारे बिजनेस फेलियर के
पीछे मुकेश का ही हाथ है और हैरानी की बात पता है क्या दोस्तों अभी तक इन दोनों भाइयों के बीच सबसे बड़ी लड़ाई होनी बाकी
थी द गैस वॉर्स जो मुकेश और अनिल के बीच में 2005 में सेटलमेंट हुआ था उस गैस
एक्सप्लोरेशन और एक्सट्रैक्शन बिजनेस मुकेश के पास आया था और पावर जनरेशन बिजनेस अनिल के पास इस गैस फोर्स किताब का
मैंने इस वीडियो में बहुत बार रेफरेंस लिया है यह एक ऐसी किताब है जो लीगल ट्रबल में आ गई थी लेकिन कोई केस इसके खिलाफ
नहीं हुआ था ये आज के दिन भी पब्लिकेशन में है जिससे साबित होता है कि जो भी इसमें लिखा गया है उसे कोई गलत साबित कर
नहीं पाया है अगर आप इस किताब को खरीदना चाहे इसका लिंक नीचे डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगा और डिटेल में और गहराई से आप इस
पूरी सिचुएशन को समझ पाएंगे अब बात कुछ ऐसी है कि अगर अनिल अंबानी को अपना पावर प्लांट खोलना है गैस का तो उसके लिए गैस
की जरूरत होगी और गैस एक्सप्लोरेशन और एक्सट्रैक्शन का बिजनेस मुकेश के पास है पावर जनरेशन बिजनेस नया था और अनिल यूपी
के दादरी में पावर प्लांट लगा रहे थे इसके लिए गैस की जरूरत थी और जब एग्रीमेंट हुआ तब मुकेश ने कहा कि वह अनिल को 2.34
प्राइस पर पर मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट्स गैस सप्लाई करेंगे और हर रोज 17 साल तक 28 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर
ए डे गैस सप्लाई की जाएगी लेकिन इसके थोड़े ही दिन बाद दोनों भाइयों में इस बात पर झगड़ा शुरू हो गया कि क्या मुकेश की
कंपनी अनिल की कंपनी को सेट प्राइस पर गैस प्रोवाइड करेगी मुकेश की कंपनी ने मिनिस्ट्री ऑफ पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस
के पास 2.34 के प्राइस को अप्रूव करने के लिए अप्लाई किया तो मिनिस्ट्री ने यह कहकर मना कर दिया कि नेचुरल रिसोर्सेस पर सरकार
प्राइस तय करेगी उस वक्त मुरली देवड़ा पेट्रोलियम मिनिस्टर थे और धीरू भाई अंबानी के करीबी थे अनिल ने कहा कि यह
मुकेश को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है सरकार कह रही है कि वह खुद प्राइस डिसाइड करेगी लेकिन वो ज्यादा प्राइस
डिसाइड करेगी ताकि फाइनली अनिल को ज्यादा पैसे पे करने पड़े गैस के लिए मु को इस बात पर दोनों भाइयों के बीच में कानूनी
लड़ाई शुरू हो गई और सरकार भी इसमें कूद गई सितंबर 2007 में एक एंपावर्ड ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स जिसको प्रणव मुखर्जी हेड कर
रहे थे उसने आरआईएल का गैस प्राइस 4.21 पर अप्रूव किया ये ऑलमोस्ट डबल प्राइस था जो
अनिल पे करते हैं तो अनिल अंबानी कोर्ट चले गए 2009 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया और यह फैसला आता है अनिल
अंबानी के पक्ष में बम्बे हाई कोर्ट कहता है कि मुकेश अंबानी को अपना फैमिली एग्रीमेंट ऑनर करना चाहिए और $2.4 के
प्राइस पर ही गैस को बेचना चाहिए इसके बाद 4 जुलाई को मुकेश अंबानी की कंपनी बॉम्बे
हाई कोर्ट की जजमेंट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पेटीशन फाइल कर देती है सुप्रीम कोर्ट में इसकी सुनवाई 20 जुलाई को होनी
थी लेकिन 18 जुलाई को ही सरकार ने इसमें पिटीशन फाइल की और कहा कि नेचुरल गैस एक नेशनल प्रॉपर्टी है और इन दोनों को गैस के
प्राइसेस तय करने का कोई अधिकार नहीं है इसलिए यह कांट्रैक्ट इनवैलिड है अनिल अंबानी आरोप लगा रहे थे कि यह यूपीए की
सरकार मुकेश अंबानी के फेवर में एक्ट कर रही है और स्पेशली यह पेट्रोलियम मंत्रालय एक ऐसे पॉलिटिशियन जो धीरू भाई के काफी
करीब रहे थे अनिल ने कहा कि सरकार ओएनजीसी जैसी कंपनियों का नुकसान कराकर मुकेश को फायदा पहुंचा रही है अनिल की कंपनीज ने
अखबारों में फ्रंट पेज ऐड्स देनी शुरू कर दी इन ऐड्स में लिखा गया सरकार और पेट्रोलियम मिनिस्ट्री मुकेश को फायदा
पहुंचा रही है और इससे सरकारी खजाने को नुकसान हो रहा है विज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि सरकार अपनी ही कंपनी एनटीपीसी
को फला इंडस्ट्री से 80 पर ज्यादा भाव पर गैस खरीदने को कह रही है इससे एनटीपीसी को
0000 करोड़ का नुकसान होगा जबकि इस डील से 0000 करोड़ का फायदा होगा परंजय
गुहा ठाकुर ता अपनी किताब गैस वर्स क्रोनी कैपिटल जम एंड द अंबानी में बताते हैं इस बीच एक बड़ा चौकाने वाला इंसीडेंट होता है
23 अप्रैल 2009 को अनिल अंबानी के हेलीकॉप्टर की मेंटेनेंस हो रही थी एक टेक्निशियन भारत बोर्गे ने पाया कि
हेलीकॉप्टर की फिल्टर नेक ढंग से फिट नहीं हो रही थी उसने उसे ठीक करने के लिए खोला तो उसके अंदर पीनट के साइज के पत्थर देखे
गए छोटे छोटे पत्थर साथ में फ्यूल टैंक के अंदर भी मिट्टी और कंकड़ पाए गए किसी ने
जान पूछकर हेली हेप्टर के अंदर पत्थर और छोटे-छोटे कंकड़ डाल रखे थे एक्सपर्ट्स के
मुताबिक अगर ये हेलीकॉप्टर उड़ा होता तो फॉर शोर क्रैश कर जाता एक बहुत ही शॉकिंग चीज क्या यहां कोई अनिल अंबानी की जान
लेने की कोशिश कर रहा था इसको लेकर कई थ्योरी चलने लगी अनिल अंबानी के लोगों ने कहा कि यह कॉरपोरेट राइवल्स ने किया है
इसके कुछ ही दिन बाद भारत बोर्गे की डेड बॉडी रेलवे ट्रैक पर मिली एक सुसाइड नोट के साथ उस सुसाइड नोट में लिखा था कि
कंकड़ मिलने के बाद मुकेश की कंपनी के कुछ ऑफिशल्स उससे मिले थे और पूछताछ करने लगे
उसको कहा कि हम दोबारा आएंगे और वो इससे डर गए हालांकि पुलिस उसके इस सुसाइड नोट से संतुष्ट नहीं थी और उन्होंने
हेलीकॉप्टर में सेबो आज और उसकी हत्या के लिए उसके को वर्कर्स को अरेस्ट किया लेकिन यहां भी अनिल और मुकेश के कंपनी के लोग एक
दूसरे पर आरोप लगाने लगे खैर इस गैस वॉर पर वापस आए तो इस पर कोर्ट में सुनवाई हुई और कोर्ट ने कहा कि गैस सरकारी प्रॉपर्टी
है और सरकार ही दाम तय करेगी ना कि अंबानी इस जजमेंट के टाइम अनिल अंबानी सुप्रीम
कोर्ट में थे और यह उनके लिए तीसरा बड़ा झटका था इस जजमेंट का मतलब था मुकेश अंबानी कई हजार करोड़ और अमीर बन जाएंगे
और अनिल अंबानी को कई हजार करोड़ों का नुकसान होगा इस एक जजमेंट के बाद ना सिर्फ
अनिल अंबानी की
reliance1 मई 2010 मुकेश और अनिल दोनों की कंपनियों ने एक प्रेस स्टेटमेंट जारी की
और कहा कि उनकी फैमिली एग्रीमेंट जो बनाई गई थी नॉन कंपीट एग्रीमेंट थी अब दोनों
भाई इसे खत्म करने का फैसला ले रहे हैं खत्म करने का मतलब था कि दोनों भाई अब सारे बिजनेसेस में जा सकते थे और एक दूसरे
के खिलाफ के बिजनेसेस में भी जा सकते थे मुकेश कोर्ट में लड़ाई जीत गए थे और अब अनिल को गैस के लिए उनकी जरूरत थी महंगे
दाम में ही सही नॉन कंपीट खत्म करने की वजह से उनको पावर प्लांट में कम से कम गैस तो मिल रही थी लेकिन बाद में जो हुआ उससे
लगा कि मुकेश ने नॉन कंपीट हटवा लिया लेकिन फिर भी अनिल के हाथ ज्यादा कुछ नहीं आया अनिल अंबानी अपने दादरी में बनने वाले
पार प्रोजेक्ट के लिए पहले से ही प्रॉब्लम्स फेस कर रहे थे उस प्रोजेक्ट को जमीन की जरूरत थी और 2004 में यूपी की
मुलायम सिंह यादव की सरकार ने इसके लिए एक इमरजेंसी प्रोविजन का इस्तेमाल किया और अनिल अंबानी को जमीन दिलवा दी ऐसा करते
समय उन किसानों से नहीं पूछा गया जिनकी यह जमीन थी तो इस बात के खिलाफ पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह और कांग्रेस के
राज बब्बर ने विरोध किया और इलाहाबाद हाई कोर्ट में पिटीशन फाइल करी दिसंबर 2009
में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपनी जजमेंट सुनाई और यह जजमेंट किसानों के फेवर में थी कोर्ट ने कहा कि अगर सरकार को किसानों
की जमीन किसी कंपनी को इस तरीके से देनी थी तो हर एक किसान से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना जरूरी था और अगर किसानों
को अपनी जमीन वापस चाहिए तो उनको अनिल अंबानी की कंपनी से जो भी मुआवजा मिला है उसे लौटा करर अपनी जमीन वापस ले सकते हैं
इसके खिलाफ अनिल अंबानी पहले तो सुप्रीम कोर्ट में चले गए लेकिन 2014 में कोर्ट में जाकर कहते हैं कि अब उन्हें इस
प्रोजेक्ट में कोई इंटरेस्ट नहीं है उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट के लिए गैस सप्लाई सुनिश्चित करना बहुत मुश्किल बन
गया है तो वह किसानों की जमीन लौटा देते हैं हजारों करोड़ का नुकसान और एक और बड़ा
झटका अनिल अंबानी को लेकिन अनिल के पास अभी भी एक बड़ा बिजनेस था टेलीकॉम का बिजनेस बस दिक्कत ये थी कि जब बंटवारे में
अनिल को टेलीकॉम बिजनेस मिला था तब अनिल को कोई आईडिया नहीं था कि यह बिजनेस कितना कंपटिंग हो सकता है ऊपर से इस बिजनेस में
भारी पैसों की इन्वेस्टमेंट की जरूरत थी अगर सक्सेसफुल होना था तो 2010 तक आते-आते इंडियन टेलीकॉम इंडस्ट्री 2g से 3g पर
शिफ्ट हो रही थी इंटरनेट सेवाएं शुरू हो रही थी और उसके लिए टेलीकॉम इक्विपमेंट और स्पेक्ट्रम परचेस में हैवी इन्वेस्टमेंट
करने की जरूरत थी हजारों करोड़ों रुपए की जरूरत थी अनिल ने 3g में इन्वेस्ट करना शुरू किया इसकी वजह से उनकी कंपनी
00 करोड़ रपए का कर्ज आ गया अपने ऊपर कर्ज कम करने के लिए अनिल ने टावर ऑपरेशंस के
लिए जीटीएल इंफ्राटेक से 50000 करोड़ की डील करने की कोशिश करी एक मर्जर करने का
कोशिश की लेकिन यह प्लान भी फेल रहा अगले साल 2जी स्पेक्ट्रम का लेजंड घोटाला होता
है और 122 टेलीकॉम लाइसेंसेस को देश भर में कैंसिल किया जाता है इनमें से एक लाइसेंस अनिल अंबानी का भी था सीबीआई अनिल
अंबानी से स्वन टेलीकॉम को प्रमोट करने में उनके रोल के बारे में पूछताछ करती है अनिल अंबानी रोल इन द शेयर ऑफ स्वन वाज
बीइंग अ प्रोब्ड द सीबीआई सेड दैट अनिल अंबानी सोल्ड स्वन शेयर्स टू डेल्फी एट
थ्रो अवे प्राइसेस लेकिन इसके बाद भी अनिल अंबानी 3g में इन्वेस्ट करते रहते हैं मुकेश अंबानी दूसरी तरफ अपना 4g नेटवर्क
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शुरू किया था तो दो तरीके के सिम कार्ड्स होते थे एक जीएसएम सिम कार्ड और एक सीडीएमए सिम कार्ड मुकेश ने
reliance1 में दिक्कत यह थी कि इस पर सिर्फ 2g और 3g की टेक्नोलॉजी चल सकती थी 4g नहीं चलता था तो अनिल अंबानी की
reliance1 साल के भीतर भीतर अपने सारे सिम कार्ड्स को सीडीएम में से जीएसएम पर शिफ्ट करना था ऐसा करना काफी डिफिकल्ट था बहुत
सारे और पैसों का खर्चा साल 2012 तक
[संगीत]
[संगीत] vodafone-idea स देकर सबके कस्टमर्स छीन लिए j डाटा वॉइस वीडियो विल बी अवेलेबल
फॉर एवरीवन एब्सलूट फ्री अनिल अंबानी के टेलीकॉम बिजनेस की हालत बद से बदतर हो गई
एक आखिरी ऑप्शन के तौर पर अनिल अंबानी ने अपनी कंपनी को 2017 में मर्ज करने की कोशिश करी एयर सेल कंपनी के साथ लेकिन यह
डील भी फेल हो गई इस डील के फेल होने की वजह से कैनेडियन कंपनी ब्रुकफील्ड के साथ जो अनिल की टावर डील थी वो भी फेल हो गई
और इसके बाद कम्युनिकेशन ने अपने 2g और 3g बिजनेस को बंद करने की घोषणा कर दी 2017 तक
reliance1 करोड़ का डेट था कुछ कर्ज कम करने के लिए इन्होंने अपने टावर और फाइबर
बिजनेस को बेचने की कोशिश करी 0000 करोड़ की डील में टिल मैन और टीपीजी को लेकिन यह
डील भी फेल हो गई जब और कोई ऑप्शन नहीं बचा तो अनिल अंबानी अपने भाई मुकेश अंबानी के पास जाते हैं अपनी
हैं
reliance1 तक आते-आते अनिल अंबानी ने रेगुलरली कोर्ट के चक्कर लगाने शुरू कर दिए थे क्योंकि उन पर कर्ज इतना बढ़ चुका
था कर्जदार उनके पीछे पड़े थे एरिक्सन कंपनी ने अनिल पर डिफॉल्ट का इल्जाम लगाया
और 2018 में एरिक्सन सुप्रीम कोर्ट चला गया सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी को कहा कि 30 सितंबर 2018 तक एरिक्सन के 50 करोड़
वापस करो लेकिन अनिल अंबानी यह पैसे भी वापस नहीं कर पाए और एरिक्सन ने सुप्रीम कोर्ट में कंटेम पिटीशन फाइल कर दी कोर्ट
ने कहा कि अगर मार्च 2019 तक अनिल एरिक्सन को ये पैसे नहीं दे पाएंगे तो कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट की वजह से उन्हें जेल जाना पड़ेगा
ब्लूमबर्ग की इस रिपोर्ट के मुताबिक अनिल अंबानी को जेल जाने से बचाने के लिए उनकी मां मुकेश अंबानी से मदद मांगती है अनिल
ने मुकेश के पास जाकर नेगोशिएशन की और लेजली अनिल को एक तरीके से मुकेश के सामने
भीख मांगनी पड़ी कि वो उनकी मदद करें आखिर में मुकेश उनकी मदद करते हैं एरिक्सन को
पेंडिंग पैसे देकर मुकेश अंबानी अनिल अंबानी को जेल जाने से बचा लेते हैं 25
सितंबर 2019 को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने
[संगीत]
reliance1 इनकी सारी कंपनियों पर कुल मिलाकर 172000 करोड़ रुपए का कर्ज था इंडिया टुडे
के मुताबिक असल में अनिल ऐसे बिजनेसेस में घुसे जहां पर बहुत सारे पैसे की जरूरत थी और उन्होंने जो फैसले लिए वह स्ट्रेटेजी
से ज्यादा एंबिशन पर बेस्ड थे नेताओं से कनेक्शंस के दम पर पब्लिक सेक्टर बैंक्स की मदद से बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स को फंड
करना अनल इस में सबसे आगे थे लेकिन 2008 की ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस के बाद चीजें थोड़ी बदल गई थी और पब्लिक सेक्टर
बैंक्स अब पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर्स को फंड ज्यादा करने को तैयार नहीं थे शुरुआत में कुछ बैड लक थी लेकिन
बाद में उनके खुद के गलत फैसले थे धीरे-धीरे इनके सभी प्रोजेक्ट से हवा निकलनी शुरू हो गई 2014 में reliance1 को
अपना मल्टीप्लेक्स चेन बिग सिनेमास को बेचना पड़ा अपना कर्ज उतारने के लिए अगस्त 2018 में अनिल ने अपना
reliance1 करोड़ में बेच दिया इस सबके चलते reliance1 ज करोड़ का कर्च उतार पाया
लेकिन आज के दिन तक
मेगावाट के पावर जनरेशन प्लांट्स अटके हुए हैं क्योंकि उन्हें गैस नहीं मिल पा रही इसकी वजह से करीब 1.2 लाख करोड़ की
इन्वेस्टमेंट्स फंसी हुई है उनके मुताबिक
reliance1 प्रोजेक्ट में भी इन्होंने कोर्ट में कहा कि हमें ज्यादा माइनिंग करने की परमिशन चाहिए नहीं तो उसके बिना
वो घाटे में चली जाएगी कंपनी और यह प्रोजेक्ट भी बंद करना पड़ेगा जब दोनों भाइयों के बीच में बंटवारा हुआ था अनिल के
पास जो बिजनेस आए वो बड़े ही कैश हंग्री बिजनेस थे जिनमें लगातार इनोवेशन और इन्वेस्टमेंट की जरूरत थी लेकिन मुकेश के
पास जो बिजनेस गए वो कोर बिजनेसेस थे जैसे कि ऑयल एंड गैस उन बिजनेसेस में इतनी इनोवेशन करने की जरूरत नहीं थी और एक बार
इन्वेस्टमेंट कर दी तो वो काफी लॉन्ग टर्म तक चलती अनिल के पास कोई भी ऐसा बिजनेस नहीं आया जिससे उनको लगातार कैश फ्लो मिल
सके और उस पैसे का वो इस्तेमाल कर सके बाकी अपने बिजनेस में इन्वेस्ट करने के लिए वो तब तक ही सक्सेसफुल रहे जब तक
बैंकों से और इन्वेस्टर से अच्छी फंडिंग आ रही थी लेकिन जैसे ही फंडिंग रुकी उनके ऊपर कर्ज बढ़ता चला गया और इंटरेस्टिंग
चीज पता है क्या है दोस्तों अनिल अंबानी ने सिर्फ इंडियन बैंकों से ही नहीं बल्कि चाइनीज बैंकों से भी कर्ज लिया था तीन
चाइनीज बैंक जिनको चाइना की सरकार कंट्रोल करती है उन्होंने लंदन के हाई कोर्ट में एक लॉ सूट फाइल किया कि अनिल ने उनसे $25
मिलियन डॉलर का 2012 में
इन्होंने कोर्ट में कहा कि मेरे पास ऐसा कुछ भी नहीं बचा जिसको बेचकर मैं अपना कर्ज चुका सकूं जज ने इस बात पर कहा कि
अनिल गलत कह रहे हैं उनके पास इससे ज्यादा एसेट्स हैं हम यह नहीं मानते कि अंबानी फैमिली ने उनको अपने ही हाल पर छोड़ दिया
होगा इसके रिस्पांस में अनिल ने कोर्ट को स्टेटमेंट दी कि वो जो एक बार मुकेश अंबानी ने मेरी मदद करी थी वो सिर्फ एक ही
बार करी थी और ऐसा दोबारा नहीं होगा फरवरी 2022 में सेबी ने आनिल अंबानी को डायवर्जन
ऑफ फंड्स के आरोप में किसी भी लिस्टेड एंटिटी से डायरेक्टर के रूप में एसोसिएट होने से बैन कर दिया मार्च 2022 में अनिल
अंबानी reliance1 अगस्त 2024 डायवर्जन ऑफ फंड्स
के आरोप में सेबी अनिल अंबानी को इंडियन सिक्योरिटी मार्केट से 5 साल के लिए बैन
कर देती है आज अनिल पब्लिक में दिखना बंद हो चुके हैं ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक उनके जानने वाले कहते हैं कि अब
वो रिलीजियस और स्पिरिचुअल बन गए हैं उन्होंने मटेरियल सक्सेस को पीछे छोड़ दिया है वो अभी भी कोशिश कर रहे हैं कि
कैसे चीजों को टर्न अराउंड किया जा सके और अपनी किस्मत को बदला जा सके लेकिन अब यह इनकी हालत देखकर इंपॉसिबल लगता है इस
रिपोर्ट में लिखा गया है कि अनिल अंबानी को यह भी एडवाइस दी गई है कि वह अपने आप को बैंकर पट घोषित कर दें और अपने ऊपर
कर्ज से मुक्ति पा ले लेकिन उनको अभी भी लगता है कि अगर इस तरीके से गिव अप कर दिया तो कम बैक करने का कोई चांस नहीं
रहेगा फ्यूचर में इस वीडियो से दोस्तों आपको क्या सीख मिलती है नीचे कमेंट्स में लिखकर बताओ मेरी राय में एक चीज बड़ी साफ
है यहां पर चाहे आपके पास कितना ही पैसा क्यों ना हो चाहे आप दुनिया के सबसे अमीर आदमी ही क्यों ना हो वो पैसा आपके लिए
परिवार नहीं बना सकता पैसा आपकी ईगो और आपके घमंड को कंट्रोल भी नहीं कर सकता इसकी बात मैंने इस वाले वीडियो में भी करी
थी सोच कर देखो अगर ये दोनों भाई एक दूसरे से लड़ने की जगह साथ में मिलकर रहते और काम करते तो इनकी जिंदगी कितनी अलग होती
शायद सही कहा जाता है एक आदमी अगर दिल से गरीब हो तो दुनिया की सारी दौलत भी कम पड़ जाती
है उम्मीद है दोस्तों यह लंबा और डिटेल वीडियो आपको पसंद आया होगा अगर आप ऐसे ही
और वीडियोस देखना चाहते हैं तो कमेंट्स में लिखकर बता सकते हैं और कौन से टॉपिक्स पर देखना चाहेंगे एक सिमिलर वीडियो इससे
पहले मैंने बनाया है टाटा फैमिली के ऊपर जिनकी कहानी काफी अलग है अंबानी फैमिली के कंपैरिजन में यहां क्लिक करके उस वीडियो
को आप देख सकते हैं बहुत-बहुत धन्यवाद
[संगीत]
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